डेब्यू के बाद बदल गई थी जिंदगी
बॉलीवुड अभिनेत्री महिमा चौधरी एक बार फिर चर्चा में हैं। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर को लेकर खुलकर बात की है। अभिनेत्री ने बताया कि बड़े सुपरस्टार के साथ डेब्यू करने के बावजूद उनकी जिंदगी में स्थिरता नहीं आई, बल्कि एक लंबा संघर्ष शुरू हो गया।
महिमा चौधरी ने कहा कि डेब्यू के बाद उनके करियर में उथल-पुथल मच गई थी। उन्हें कई प्रोजेक्ट्स से बाहर कर दिया गया और मामला यहां तक पहुंचा कि उन्हें कोर्ट तक घसीटा गया। अभिनेत्री के अनुसार, उस दौर में इंडस्ट्री के भीतर फैली गलतफहमियों का सीधा असर उनके काम पर पड़ा।
शाहरुख खान के साथ डेब्यू, फिर भी मुश्किलें
महिमा चौधरी ने शाहरुख खान के साथ फिल्मी करियर की शुरुआत की थी, जिसे किसी भी नई अभिनेत्री के लिए बड़ा मौका माना जाता है। लेकिन उन्होंने बताया कि इस सफलता के बावजूद उन्हें लगातार फिल्मों से निकाला गया। वजह किसी एक फिल्म या प्रदर्शन से जुड़ी नहीं थी, बल्कि इंडस्ट्री में फैले भ्रम और कानूनी विवाद थे।
अभिनेत्री ने यह भी साझा किया कि उस समय उनके पास अपनी बात रखने के सीमित साधन थे। कई बार बिना सुने ही फैसले ले लिए जाते थे, जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ।
Fast facts:
- महिमा चौधरी ने 1990 के दशक के अंत में बॉलीवुड में डेब्यू किया
- डेब्यू के बाद उन्हें कानूनी विवादों का सामना करना पड़ा
- कई फिल्मों से उन्हें अचानक बाहर कर दिया गया
- हालिया इंटरव्यू में उन्होंने इस दौर को खुलकर याद किया
संघर्ष पर खुली बातचीत
महिमा चौधरी का मानना है कि इंडस्ट्री में शुरुआती वर्षों में कलाकारों को खुद के लिए खड़ा होना सीखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उस समय मानसिक रूप से मजबूत रहना सबसे बड़ी चुनौती थी।
इसी कड़ी में अभिनेता संजय मिश्रा का हालिया बयान भी सुर्खियों में रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि लोगों की बातों को छोड़कर खुद की सुननी चाहिए। उनके मुताबिक जिंदगी सिर्फ इंतजार करने के लिए नहीं होती, बल्कि खुद को दूसरा मौका देने के लिए भी होती है।
संघर्ष हर कलाकार की जिंदगी का हिस्सा होता है, फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उसे छुपाता है और कोई साझा करता है।
आज की नजर से बीते कल
आज जब महिमा चौधरी अपने करियर के अनुभव साझा करती हैं, तो यह कई नए कलाकारों के लिए सीख बन जाता है। उनका मानना है कि मुश्किल दौर चाहे जितना लंबा क्यों न हो, सच बोलना और खुद पर भरोसा रखना जरूरी है।
उनकी यह बातचीत एक बार फिर यह याद दिलाती है कि चमक-दमक के पीछे बॉलीवुड में संघर्ष की कहानियां भी उतनी ही सच्ची हैं।